केंद्र सरकार जातीय जनगणना के मुद्दे पर सर्वसम्मति बनाने की कवायद शुरू कर सकती है। इस पर सैद्धांतिक सहमति के साथ आगे का रोडमैप तलाशने का प्रयास सरकार की तरफ से किया जा सकता है। अभी इस मामले में कोई निर्णय नहीं हुआ है, लेकिन सूत्रों ने कहा है कि जातीय जनगणना की मांग के चलते कई तरह की पेचीदगियों को सरकार पहले हल करना चाहती है।
सूत्रों ने कहा कि सत्तारूढ़ भाजपा सैद्धांतिक तौर पर जातीय जनगणना की मांग के खिलाफ नहीं है, लेकिन इसका रास्ता क्या हो इसे लेकर स्पष्टता अभी बाकी है। एक राय यह है कि एक समिति बनाई जाए, जिसमें सभी दल शामिल हों। इसमें विचार-विमर्श के बाद कोई रास्ता तलाशा जाए। एक बार इस मसले पर आम राय बनने के बाद जनगणना को लेकर भी रास्ता साफ होगा।
गौरतलब है कि कोविड के कारण 2021 की प्रस्तावित जनगणना अभी लंबित है। इसे लेकर तैयारी चल रही है, लेकिन यह तय नहीं हुआ है कि जनगणना कब शुरू होगी। उम्मीद जताई जा रही है कि 2025 में इस पर फैसला होगा। एक अधिकारी ने कहा कि देश में एक टाइटल से जुड़ी कई जातियां हैं। एक ही टाइटल के लोगों का अलग-अलग वर्ग से संबंध है। अगर कंप्यूटर टाइटल के हिसाब से गणना करेगा तो लाखों की संख्या में जो जातियां होंगी, उनका सटीक वर्ग पता करना मुश्किल हो सकता है।